जे.सी.सी. की बैठक में मांगों पर नहीं हुआ निर्णय, पैंशनर की टूटी आस

 जे.सी.सी. की बैठक में मांगों पर नहीं हुआ निर्णय, पैंशनर की टूटी आस  

चार साल से पैशनर की मांगों की अनदेखी कर रही सरकार 

5-10-15 प्रतिशत भत्ते को मूल वेतन में नहीं किया गया शामिल 


सुंदरनगर नेक्स्ट नयूज ब्यूरो  


पैंशनर वेलफेयर एसोसिएशन जिला मंडी ने कहा हिमाचल सरकार पैंशनर की 5-10-15 प्रतिशत भत्ते को मूल वेतन में शामिल करने जैसी मांगों पर कोई कार्रवाई करने में नाकाम रही है। पैंशनर वेलफेयर एसोसिएशन जिला मंडी के सलाहकार एवं अखिल भारतीय दलित पिछड़ा अल्पसंख्यक वर्ग के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष ई निक्का राम ने कहा कि पैंशनर की 5-10-15 प्रतिशत भत्ते को मूल वेतन में शामिल करने में सरकार को कोई बडा फेरबदल नहीं करना है, लेकिन सरकार बीते चार साल में इस मांग पर कार्रवाई नहीं कर रही है। प्रदेश सरकार की नालायकी के कारण प्रदेश का पैंशनर वर्ग बेवजह परेशान हो रहा है। 


सरकार की चार साल के बाद जे.सी.सी. की बैठक में पैंशनर की मांगों पर भी चर्चा की आस टूट गई है। जे.सी.सी. की बैठक में कई अन्य मांगों की तरह पैंशनर वर्ग की मांगो पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। वर्तमान में पैंशनर के मेडिकल बिल तक भुगतान के लिए कई सालों से लंबित पड़े हैं। जिससे पैंशनर को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व की मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व की सरकार ने 5-10-15 प्रतिशत भत्ते लाभ दिया है, जो पैशनर को मिल रहा है, लेकिन वर्तमान सरकार आज तक 5-10-15 प्रतिशत भत्ते को मूल वेतन में शामिल करने की दिशा में सरकार उचित कदम नहीं उठा पाई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का पैंशनर मांगों को लेकर एकजुट है और एकमत से सरकार से मांगों को लेकर समय समय पर विभिन्न रूप से मांगे रखता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पैंशनर ने कोविड के दो साल के दौर में ही सरकार को सहयोग करने में कोई कोर कसर नहीं छोडी, सरकार के साथ कदम मिला कर चले है और प्रदेश भर से चार करोड की राशि सरकार को सहयोग में दी है। लेकिन बावजूद इसके इस वर्ग की अनदेखी की गई और मांगों को मानने मे न पहल हुई है और सरकार निर्णय तक नहीं ले पाई है। जिससे प्रदेश के पैशजर समाज में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोष है।  

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