खनन नीति के फेर में उलझी हिमाचल सरकार, demand strong mining policy

 खनन नीति के फेर में उलझी हिमाचल सरकार, demand strong mining policy

हिमाचल कांट्रेक्टर्स ने सरकार को दिया सात दिनों का अल्टिमेटम

बिना खनन नीति प्रदेश में ठप्प हो जाएंगे नए निर्माण के काम ठोस खनन नीति नहीं बनाई तो धरना प्रदर्शन करेंगे ठेकेदार नए टेंडर की प्रकिया बंद नहीं की तो जाएंगे हाईकोर्ट

केंद्र और प्रदेश में ठकेदारों के फंसे 3500 करोड़

सुंदरनगर 30 जनवरी नेक्स्ट न्यूज हिमाचल हिमाचल प्रदेश में खनन नीति की मांग को लेकर सरकारी ठेकेदारों ने मोर्चा खोल दिया है। रविवार को सुंदरनगर में हिमाचल कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार को सात दिनों ठोस नीति बनाने और उस दौर में विभिन्न विभागों के निर्माण कार्यो के ठेके की तमाम टेंडर आवंटन प्रकिया बंद करने का अल्टिमेटम दिया है।

एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष केशव नायक के नेतृत्व में पदाधिकारियों में कर्म दास निराश अजय कुमार शर्मा, जगदीश, बुद्धि सिंह ओम ज्योति पुष्पराज, रमेश रोशन गुलेरिया जगदीश ठाकुर, अनिल ठाकुर, सुरेश कुमार जीतराम ने कहा कि सरकार ठेकेदार वर्ग की मांगो की अनदेखी कर रही है। हालांकि मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने मांगों पर गंभीरता जताई और अधिकारियों को शीघ्र कार्रवाई के आदेश भी करीब एक माह पहले किए है। लेकिन अभी तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। उन्होंंने कहा कि सरकार बजट बैठक में प्रदेश की खनन नीति तय करे और ठोस नीति का निर्माण करें अन्यथा प्रदेश के सरकारी ठेकेदार हिमाचल कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के नेतृत्व में जिला मुख्यालय और सचिवालय में धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगी। जिसके होने वाले नुकसान की सरकार ही जिम्मेदार होगी। ...नए टेंडर की प्रकिया बंद नहीं की तो जाएंगे हाईकोर्ट संघ ने लोक निर्माण विभाग सहित अन्य विभागों को भी दो टूक शब्दों में चेताया है कि बिना खनन नीति व रेत बजरी और पत्थर सामग्री के टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह बंद किए जाए, अन्यथा इसके खिलाफ वेलफेयर एसोसिएशन प्रदेश हाईकोर्ट की शरण लेने के लिए मजबूर होगा। एसोसिएशन ने कहा कि प्रदेश हाईकोर्ट के एम फार्म के बिना पेमेंट ना देने की शर्त में सरकार हस्तक्षेप करें और कांट्रेक्टर के लिए खनन नीति बनाई जाए। ताकि प्रदेश के निर्माण कार्य किए जा सकें। खनन नीति बनाने की बैठक में शामिल किए जाए कांट्रेक्टर कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन ने मांग की है कि प्रदेश सरकार खनन नीति के निर्माण की बैठक में इस वर्ग को भी शामिल करे। ताकि इस वर्ग की समस्या को सही रखा जा सके।

.....डबल इंजन की सरकार में ठेकेदारों के रूके 3500 करोड़ ...हिमाचल कांट्रेक्टर के करीब दो हजार ठेकेदारों के एम फार्म के कारण सरकार के मुताबिक 198 करोड़ और एसोसिएशन के मुताबिक 500 करोड़ का भुगतान लटका है। ....जबकि केंद्र सरकार की ढुलमुल रवैये के कारण जी.एस.टी. के 3000 करोड़ के भुगतान लटका है। .... प्रदेश का ठेकेदार केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों के अभाव में दोहरी मार झेल रहा है। मंडी जिले में तीन साल से खनन विभाग 8 करोड़ के खनन के टेंडर करके चुप बैठा है। खनन विभाग द्वारा एफ.सीए.ए. की मंजूरी की आड़ में काम ठप्प पड़ा है। जिससे रेत बजरी की आपूर्ति नहीं हो रहा है और विभाग द्वारा मामले में कार्रवाई नहीं की जा रही है।

https://youtu.be/B9WWBRDoJfc

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