बंदला में इस वर्ष बीटेक कार्यक्रम में शुरू होगी कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग
बंदला हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज को देश का सर्व श्रेष्ठ बनाने की मुहिम तेज
हिमाचल तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने लिए निर्णय
हाइड्रो और पावर अनुसंधान केंद्र की होगी स्थापना
शिमला। हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि बिलासपुर जिले में स्थित राजकीय हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज बंदला में इस वर्ष बीटेक कार्यक्रम में कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग (कृत्रिम मेधा व डाटा साइंस) नया पाठ्यक्रम शुरू किया गया है।
अकादमिक सत्र वर्ष 2023- 24 के लिए पहली बार शुरू किए गए पाठ्यक्रम में मेरिट आधार पर 76 सीटें भरी जा चुकी हैं। वर्तमान में उभरती हुई प्रौद्योगिकी युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
हिमाचल सरकार राज्य के तकनीकी संस्थानों में नई पीढ़ी के पाठ्यक्रम शुरू करने को प्राथमिकता प्रदान कर रही है। राजकीय बहुतकनीकी संस्थान, रोहडू एवं चंबा में कंप्यूटर इंजीनियरिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्ज व मैकेट्रॉनिक्स के विशिष्ट पाठ्यक्रम शुरू किए ग हैं। प्रदेश के 17 औद्योगिक तकनीकी संस्थानों में इसी अकादमिक सत्र से औद्योगिक क्षेत्र की मांग के अनुरूप इलेक्ट्रिक व्हीकल मेकेनिक, तकनीकी मैकेट्रॉनिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्ज सहित नई पीढ़ी के अन्य पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।
इसके लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और प्रशिक्षु इसमें गहन रूचि दर्शा रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश के बंदला स्थित हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज में पीएचडी कोर्स शुरू होगा।
इससे पहले हिमाचल सचिवालय में पीएचडी कोर्स पर मुहर लगा दी गई है। वीरवार को राज्य सचिवालय में तकनीकी शिक्षा सचिव अभिषेक जैन की अध्यक्षता में हुई कॉलेज के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में कोर्स शुरू करने का फैसला लिया गया।
वहीं कॉलेज में 60 लाख रुपये से डिजिटल पुस्तकालय बनाया जाएगा। 50 लाख की लागत से अत्याधुनिक कंप्यूटर खरीदे जाएंगे। तकनीकी शिक्षा सचिव ने हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज बिलासपुर को भारत का सर्वश्रेष्ठ हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज बनाने की दृष्टि से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने हाइड्रो और पावर क्षेत्र में अनुसंधान केंद्र की स्थापना पर बल दिया जो कि एनटीपीसी और एनएचपीसी संगठनों के सहयोग से गठित किया जाएगा।
उन्होंने संस्थान में खेलकूद गतिविधियां बढ़ाने, ग्रीन कैंपस और बोटेनिकल गार्डन स्थापित करने की दिशा में भी कार्य करने को कहा। बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने संस्थान में एक संग्रहालय की स्थापना पर बल दिया। इसमें हाइड्रो व पावर संबंधित परियोजनाओं के मॉडल प्रदर्शित होंगे और छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होगा। बैठक में संस्थान में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसकी अनुमानित राशि लगभग 60 लाख है।
बोर्ड ने प्रदेश तकनीकी विवि को हाइड्रो इंजीनियरिंग महाविद्यालय में पीएचडी कोर्स शुरू करने के निर्देश भी दिए गए। एक कार्यशाला स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक की जानकारी प्राप्त होगी। कॉलेज के निदेशक प्रो. हिमांशु मोगा, निदेशक तकनीकी शिक्षा विवेक चंदेल, एनटीपीसी, एनएचपीसी के प्रतिनिधि बैठक मौजूद रहे।
.....सुंदरनगर से अंसारी की रिर्पोट।
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