भनवाड़ के किसानों को बताए प्राकृतिक खेती के गुर

 भनवाड़ के किसानों को बताए प्राकृतिक खेती के गुर 

प्राकृतिक खेती जमीन के लिए फायदेमंद - लेखराज


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सुंदरनगर। अंसारी। 

कृषि विभाग हिमाचल प्रदेश जिला मंडी कृषि प्रद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण आत्मा जिला मंडी विकास खंड सुंदरनगर द्वारा ग्रामपंचायत भनवाड़ के पंजरयाला गांव में प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के अंतर्गत प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया जिसमें किसानों को प्राकृतिक खेती व प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले सभी  घटकों के बारे में भी बिस्तार पूर्वक जानकारी दी गयी।

सुंदरनगर कृषि विकासखंड के खंड तकनीकी प्रबंधक लेखराज और सहायक तकनीकी प्रबंधक शिवानी शर्मा ने किसानों को प्राकृतिक खेती  में उपयोग होने वाले घटकों को प्रयोगात्मक रूप से बताया गया जिसमें बीजामृत, घनजीवामृत, जीवामृत,द्रेकस्त्र, ब्रह्मास्त्र, अग्निअस्त्र तथा सप्तधान्य अंकुर अर्क आदि थे।


प्राकृतिक खेती खुशहाल योजना

योजना के तहत राज्य सरकार की कोशिश है कि खेती में कैमिकल फर्टिलाइजर और कीटनाशक के उपयोग को खत्म करना है. योजना के तहत हिमाचल प्रदेश के 3226 में से 2934 पंचायतों के 72,193 किसान परिवारों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा.

जमीन के लिए फायदेमंद।

लेखराज ने कहा कि किसान अपनी फसल को किसी भी प्रकार की बीमारी या कीड़े से बचने के लिए अलग-अलग प्रकार के रासायनिक और कीटनाशकों का छिड़काव करते है। इसके कारण जमीन के उपजाऊपन को नुकसान पहुँचता है और कुछ समय बाद फसलों की पैदावार भी अच्छे से नहीं हो पाती है। मगर शून्य बजट प्राकृतिक खेती के दौरान जमीन का उपजाऊपन बना रहता है और फसलों की पैदावार भी अच्छी होती है।

आज का किसान भी स्वास्थ्य पर पड़ रहे रासायनिक उर्वरकों के हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर हो रहा है जिसमें केवल जैविक उर्वरकों का ही प्रयोग किया जा रहा है।

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