सन 1870 को बगसी राम नामक व्यक्ति द्वारा तैयार करवाई गई थी टांकरी - कारदारों से सामने आई कई अहम बाते

 रियासत कालीन देवी देवताओं के कारदारों से सामने आई कई अहम बाते 

दुर्लभ लिपि टांकरी के संर्वधन और संरक्षण पर कार्याशाला 

विक्रमी संवत 1927 ई.् सन 1870 को बगसी राम नामक व्यक्ति द्वारा तैयार करवाई गई थी टांकरी



नेक्स्ट न्यूज हिमाचल 

सुंदरनगर 9 अप्रैल (अंसारी) 



दुर्लभ लिपि टांकरी के संर्वधन और संरक्षण की मुहिम के तहत सुंदरनगर के राज्य स्तरीय देवता मेला में कार्याशाला का आयोजन किया गया। हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी की गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत पैलेस कालोनी में पारूल अरोड़ा ने सुंदरनगर में आए  रियासत कालीन देवी देवताओं के गुर और पुजारियों से भेंट कर दुर्लभ पांडुलिपि पर चर्चा की टांकरी लिपि की समीक्षा की है। इस दौरान कई अहम बाते सामने भी आई है। 

गौर हो कि हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी की गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत विशेष रूप से पैलेस कालोनी में पारूल अरोड़ा द्वारा पांच शिक्षाॢथयों को टांकरी लिपि लिखना व पढऩा सीखा रहे हैं। पारूल अरोड़ा के नेतृत्व में टीम ने देवी देवताओं से विभिन्न पहलुओं पर चर्चा कर समीक्षा की है। उन्होने कारदारों और देवलुओं सहित गुर और पुजारी को विलुप्त होती टांकरी लिपि के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया। बता दें कि गत वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में ही वर्ण माला टांकरी पोथी, की पुस्तक टांकरी लिपि की प्रदर्शनी के दौरान मेले में एक व्यक्ति से प्राप्त हुई थी। यह पोथी प्रथम बार राजा बिजय सेन द्वारा विद्यालयों में पढ़ाने के लिए विक्रमी संवत 1927 ई.् सन 1870 को बगसी राम नामक व्यक्ति द्वारा तैयार करवाई गई थी। तत्पश्चात राजा जोङ्क्षगद्र्र सेन ने चौथी बार विक्रमी संवत 1986 ई् सन 1929 में बगसी राम के बेटे जैऐकीसन अत्रचंद द्वारा तैयार करवाई गई थी। राजा जोङ्क्षगद्र सेन ने वर्तमान विजय हाई स्कूल में विद्याॢथयों को पढ़ाने के लिए इस पोथी को लागू किया था। इस पोथी में स्वरए व्यंजन, बाराखड़ी, अंक, कालगणना, पत्र व्यवहार, मुद्रा गणना, नापतोल, राजकाज व्यवहार, टांकरी में पहाड़े आदि शामिल हैं। इसी को आधार बनाते हुए यह कार्यशाला लगाई जा रही है। भारतवर्ष में एक भारत से श्रेष्ठ भारत और अमृत महोत्सव के अंतर्गत सांस्कृतिक भारत की कला संस्कृति और दुर्लभ भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्यक्रम निरंतर चलाए जा रहे हैं। 



 सुंदरनगर: करसोग के बडेयोगी देव के गुर मनोहर जी से भेंट कर टांकरी लिपि पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी की गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत पैलेस कालोनी में पारूल अरोड़ा (अंसारी) 


About Himachaltoday.in -by Ansari.

0 Comments:

एक टिप्पणी भेजें

If you have any Quary than