कर्ज लेकर सरकार चलाने की मानसिकता से नहीं बने दोनो प्रोजेक्ट
न बना एअरपोर्ट - न बना बग्गी हाईडल प्रोजेक्ट
सरकार की लापरवाही से हिमाचल को 3000 करोड़ का नुकसान
नए सिरे से बीबीएमबी से बग्गी योजना का करार करे सरकार
ई निक्का राम चौधरी ने सरकार पर लगाए लापरवाही के आरोप
Next 2 News Himachalसुंदरनगर, 2 अगस्त
बीबीएमबी की नहर पर चासील मेगावाट के पनविद्युत परियोजना के निर्माण में लापरवाही से प्रदेश को करीब करोड का आर्थिक नुकसान झेलना पडा है।
नाचन और बल्ह की जनता के हित में मांग की गई है कि भाजपा की डबल इंजन सरकार बग्गी पन विद्युत परियोजना के बीएसएल परियोजना से करार की समय सीमा को आगे बढ़ाएं और इस परियोजना का स्वयं हिमाचल सरकार ही निर्माण करे। ताकि सरकार की आय भी बढ़े और बेरोजगार को रोजगार भी उपलब्ध हो।
नौलखा के ई निक्का राम चौधरी ने कहा कि सरकार इस परियोजना के स्वयं बनाने के लिए आगामी कार्रवाई पूरी करे। उन्होने सुंदरनगर में जारी बयान में प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार निर्णय ले लेती तो बीबीबीएम की नहर पर बग्गी में यह कार्य चल रहा होता। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर पर आरोप लगाया कि कर्ज लेकर सरकार चलाने की मानसिकता के कारण सीएम इस परियोजना का निर्माण नहीं कर पाए है। उन्होने जानकारी देते हुए कहा कि 1970 के दशक में भारत सरकार भाखड़ा व्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) बनाई गई बीएसएल परियोजना के निर्माण के दौरान ही हिमाचल सरकार से करार हो चुका था। जिसके तहत बग्गी में हिमाचल सरकार द्वारा पन विद्युत परियोजना का निर्माण करना है। यह कार्य 40 वर्षों की समय अबधि में पूरा करना है अन्यथा इस कार्य को भाखड़ा व्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) के अधीन किया जाने का प्रस्ताव तय किया था। आरोप है कि 40 वर्ष बीत चुके है और हिमाचल सरकार यह कार्य तय 40 वर्षों में करना तो दूर इस पर कार्य शुरू तक करने में नाकाम रही है। इसके बावजूद कर्ज की मस्ती मेें चूर भाजपा की हिमाचल सरकार 40 वर्षों के करार की अवधि तक बढ़वाने में भी असफल रही है।
नतीजन यह परियोजना बीबीएमबी के अधीन चली गई है। ई निक्का राम चौधरी ने कहा कि अब इस कार्य को बीबीएमबी द्वारा करना भी शुरू कर दिया है। उन्होनें कहा कि इन 40 वर्षों में 25 वर्ष भाजपा सरकार सता में रही है।
उन्होने साफ किया कि सरकार की लापरवाही से हिमाचल को 3000 करोड़ का नुकसान हो चूका है और आगामी 55 वर्षों में 6000 -7000 करोड़ का घाटा होगा। उन्होने आरोप लगाया कि इस कार्य को लेकर सरकार को इस योजना के निर्माण की पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में करने की पेशकश की गई।

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